तीन पहर तो बीत गये तीन पहर तो बीत गये, यह रचना दिल को छू गई। तीन पहर तो बीत गये, बस एक पहर ही बाकी है। जीवन हाथों से फि… byसाहित्य संगम April 17, 2026