अर्थालंकार : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Arth Alankar in Hindi

अर्थालंकार : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Arth Alankar in Hindi

 

अर्थालंकार : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Arth Alankar in Hindi

अर्थालंकार क्या है?

जब काव्य में शब्दों की ध्वनि नहीं बल्कि उनके अर्थ के माध्यम से सौंदर्य, चमत्कार या प्रभाव उत्पन्न होता है, वहाँ अर्थालंकार होता है।

परिभाषा

जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ अर्थालंकार कहलाता है।

अर्थालंकार में शब्दों की विशेषता नहीं, बल्कि उनके अर्थ की विलक्षणता मुख्य होती है।


अर्थालंकार के प्रमुख भेद

  1. उपमा अलंकार

  2. रूपक अलंकार

  3. उत्प्रेक्षा अलंकार

  4. दृष्टान्त अलंकार

  5. संदेह अलंकार

  6. अतिशयोक्ति अलंकार

  7. उपमेयोपमा अलंकार

  8. प्रतीप अलंकार

  9. अनन्वय अलंकार

  10. भ्रांतिमान अलंकार

  11. दीपक अलंकार

  12. अपहृति अलंकार

  13. व्यतिरेक अलंकार

  14. विभावना अलंकार

  15. विशेषोक्ति अलंकार

  16. अर्थान्तरन्यास अलंकार

  17. उल्लेख अलंकार

  18. विरोधाभाष अलंकार

  19. असंगति अलंकार

  20. मानवीकरण अलंकार

  21. अन्योक्ति अलंकार

  22. काव्यलिंग अलंकार

  23. स्वभावोक्ति अलंकार

  24. कारणमाला अलंकार

  25. पर्याय अलंकार

  26. समासोक्ति अलंकार


1. उपमा अलंकार
परिभाषा

जब किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव की तुलना किसी दूसरी वस्तु से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।

उदाहरण

सागर सा गंभीर हृदय हो, गिरि सा ऊँचा हो जिसका मन।


उपमा अलंकार के चार अंग

  1. उपमेय

  2. उपमान

  3. वाचक शब्द

  4. साधारण धर्म


उपमा अलंकार के भेद

  • पूर्णोपमा

  • लुप्तोपमा


2. रूपक अलंकार
परिभाषा

जहाँ उपमेय और उपमान में भेद न रहे, वहाँ रूपक अलंकार होता है।

उदाहरण

उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बाल पतंग।


रूपक अलंकार के भेद

  • सम रूपक

  • अधिक रूपक

  • न्यून रूपक


3. उत्प्रेक्षा अलंकार
परिभाषा

जहाँ कल्पना की प्रधानता हो, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उदाहरण

सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल।


उत्प्रेक्षा के भेद

  • वस्तुप्रेक्षा

  • हेतुप्रेक्षा

  • फलोत्प्रेक्षा


4. दृष्टान्त अलंकार
परिभाषा

जब किसी बात को उदाहरण या बिम्ब-प्रतिबिम्ब द्वारा स्पष्ट किया जाए।

उदाहरण

एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं।


5. संदेह अलंकार
परिभाषा

जहाँ किसी वस्तु की पहचान में संशय उत्पन्न हो।

उदाहरण

यह काया है या शेष की छाया?


6. अतिशयोक्ति अलंकार
परिभाषा

जब किसी बात को सीमा से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए।

उदाहरण

हनुमान की पूंछ में लगन न पायी आगि, सगरी लंका जल गई।


7. उपमेयोपमा अलंकार
परिभाषा

जब उपमेय और उपमान दोनों की तुलना एक-दूसरे से की जाए।

उदाहरण

तौ मुख सोहत है ससि सो, अरु सोहत है ससि तो मुख जैसो।


8. प्रतीप अलंकार
परिभाषा

जब उपमा उल्टे क्रम में दी जाए।

उदाहरण

नेत्र के समान कमल है।


9. अनन्वय अलंकार
परिभाषा

जहाँ उपमेय के समान कोई दूसरा न हो।

उदाहरण

भारत के सम भारत है।


10. भ्रांतिमान अलंकार
परिभाषा

जहाँ भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो।

उदाहरण

महावर देने को नाइन बैठी आय।


11. दीपक अलंकार
परिभाषा

जब एक ही गुण अनेक वस्तुओं पर समान रूप से लागू हो।

उदाहरण

अरविंदन में इंदिरा, सुन्दरि नैनन लाज।


12. अपहृति अलंकार
परिभाषा

जब सत्य को छिपाकर असत्य को स्थापित किया जाए।

उदाहरण

सुनहु नाथ रघुवीर कृपाला, बन्धु न होय मोर यह काला।


13. व्यतिरेक अलंकार
परिभाषा

जब उपमेय को उपमान से श्रेष्ठ बताया जाए।

उदाहरण

मुख की समानता चंद्रमा से कैसे दूँ?


14. विभावना अलंकार
परिभाषा

जहाँ बिना कारण के कार्य होना दिखाया जाए।

उदाहरण

बिनु पग चलै, सुनै बिनु काना।


15. विशेषोक्ति अलंकार
परिभाषा

जब सभी कारण उपस्थित हों, फिर भी कार्य न हो।

उदाहरण

नीर भरे नितप्रति रहें, तऊ न प्यास बुझाई।


16. अर्थान्तरन्यास अलंकार
परिभाषा

जब एक कथन दूसरे कथन का समर्थन करे।

उदाहरण

कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाए।


17. उल्लेख अलंकार
परिभाषा

जब एक ही वस्तु को अनेक रूपों में प्रस्तुत किया जाए।

उदाहरण

विन्दु में थीं तुम सिन्धु अनन्त।


18. विरोधाभाष अलंकार
परिभाषा

जहाँ विरोध का आभास हो।

उदाहरण

आग हूँ जिससे ढुलकते बिंदु हिमजल के।


19. असंगति अलंकार
परिभाषा

जहाँ कारण और कार्य में असंगति हो।

उदाहरण

ह्रदय घाव मेरे पीर रघुवीरै।


20. मानवीकरण अलंकार
परिभाषा

जब जड़ वस्तुओं में मानव गुणों का आरोप किया जाए।

उदाहरण

अम्बर पनघट में डुबो रही, तारा घट उषा नगरी।


21. अन्योक्ति अलंकार
परिभाषा

जब एक बात के माध्यम से दूसरी बात कही जाए।

उदाहरण

फूलों के आस-पास रहते हैं, फिर भी काँटे उदास रहते हैं।


22. काव्यलिंग अलंकार
परिभाषा

जब युक्तियुक्त बातों द्वारा किसी कथन का समर्थन किया जाए।

उदाहरण

कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय।


23. स्वभावोक्ति अलंकार
परिभाषा

जब किसी वस्तु या व्यक्ति का स्वाभाविक वर्णन किया जाए।

उदाहरण

सीस मुकुट कटी काछनी, कर मुरली उर माल।

कमल दिवस में खिलता है और रात्रि में मुरझा जाता है।


24. कारणमाला अलंकार
परिभाषा

जब घटनाओं या परिणामों को कारणों की श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

उदाहरण

वर्षा हुई → फसल लहलहाई → किसान प्रसन्न हुआ → गाँव में उत्सव छा गया।


25. पर्याय अलंकार
परिभाषा

जब एक ही वस्तु के लिए अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जाए।

उदाहरण

राम रघुनाथ, दशरथनंदन, कौसल्यासुत, रघुकुल-नायक।

सूर्य, भानु, दिवाकर, दिनकर, रवि, मित्र।


26. समासोक्ति अलंकार
परिभाषा

जब किसी भाव या वस्तु का संक्षिप्त किन्तु गहन अर्थपूर्ण वर्णन किया जाए।

उदाहरण

सिर पर बर्फ, मुख पर जल, भीतर आग सरीखा मन।

जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि।


निष्कर्ष

अर्थालंकार हिंदी साहित्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।
यह कविता में भाव, कल्पना, सौंदर्य और गहराई उत्पन्न करता है। उपमा, रूपक, अतिशयोक्ति, मानवीकरण आदि अलंकार काव्य को प्रभावशाली और रसपूर्ण बनाते हैं।


FAQs – अर्थालंकार

प्रश्न 1: अर्थालंकार क्या है?

उत्तर: जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अर्थालंकार होता है।

प्रश्न 2: उपमा अलंकार किसे कहते हैं?

उत्तर: जब किसी वस्तु की तुलना दूसरी वस्तु से की जाए।

प्रश्न 3: रूपक और उपमा में क्या अंतर है?

उत्तर: उपमा में तुलना होती है, जबकि रूपक में उपमेय और उपमान का भेद समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 4: मानवीकरण अलंकार का उदाहरण बताइए।

उत्तर: “अम्बर पनघट में डुबो रही…” — यहाँ प्रकृति को मानव रूप दिया गया है।

प्रश्न 5: अतिशयोक्ति अलंकार क्या है?

उत्तर: जब किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

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