उभयालंकार : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Ubhay Alankar in Hindi
उभयालंकार क्या है?
जब किसी काव्य में शब्द और अर्थ — दोनों के माध्यम से सौंदर्य या चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ उभयालंकार होता है।
अर्थात् जिस अलंकार में शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों का प्रभाव दिखाई दे, उसे उभयालंकार कहते हैं।
उभयालंकार की परिभाषा
जहाँ शब्द और अर्थ दोनों के कारण काव्य की शोभा बढ़े, वहाँ उभयालंकार होता है।
उदाहरण
कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय।
यहाँ शब्दों की मधुर पुनरावृत्ति और अर्थ की सुंदरता दोनों उपस्थित हैं।
उभयालंकार के भेद
उभयालंकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
संसृष्टि उभयालंकार
संकर उभयालंकार
1. संसृष्टि उभयालंकार
परिभाषा
जब एक ही काव्यांश में अनेक अलंकार उपस्थित हों और उन्हें अलग-अलग पहचानना सरल हो, वहाँ संसृष्टि उभयालंकार होता है।
अर्थात् शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
उदाहरण
“बाल ब्याल बक बांकुरे, कपोलन कहि न जाए।
सूर स्याम सुंदर बरन, लजि तारे अरुनाय॥” — सूरदास
इसमें उपस्थित अलंकार
अनुप्रास अलंकार → “बाल, ब्याल, बक, बांकुरे” में ध्वनि की आवृत्ति
रूपक अलंकार → श्याम वर्ण की सुंदरता का चित्रण
यहाँ दोनों अलंकार स्पष्ट रूप से अलग पहचाने जा सकते हैं।
2. संकर उभयालंकार
परिभाषा
जब एक ही काव्यांश में अनेक अलंकार इस प्रकार मिश्रित हो जाएँ कि उन्हें अलग-अलग पहचानना कठिन हो, वहाँ संकर उभयालंकार होता है।
उदाहरण
“सिंधु सघन घन घेरि घन, घेरि घेरि घेरत हैं।
गर्जन घेरि घन घेरि, बरसन घेरि बरसत हैं॥” — भूषण
इसमें उपस्थित अलंकार
अनुप्रास
यमक
उत्प्रेक्षा
ये सभी अलंकार इतने घुल-मिल गए हैं कि इन्हें अलग करना कठिन हो जाता है।
संसृष्टि और संकर उभयालंकार में अंतर
| आधार | संसृष्टि उभयालंकार | संकर उभयालंकार |
|---|---|---|
| पहचान | अलंकार अलग-अलग पहचाने जा सकते हैं | अलंकार घुल-मिल जाते हैं |
| स्पष्टता | स्पष्ट | मिश्रित |
| समझ | सरल | थोड़ी कठिन |
| उदाहरण | अनुप्रास + रूपक स्पष्ट | अनुप्रास + यमक + उत्प्रेक्षा मिश्रित |
उभयालंकार का महत्व
काव्य को अधिक प्रभावशाली बनाता है
भाषा में मधुरता और गहराई लाता है
पाठक के मन पर गहरा प्रभाव डालता है
कविता को आकर्षक और कलात्मक बनाता है
निष्कर्ष
उभयालंकार हिंदी साहित्य का अत्यंत सुंदर और प्रभावशाली अलंकार है।
इसमें शब्द और अर्थ दोनों का समन्वय होता है, जिससे काव्य की शोभा कई गुना बढ़ जाती है। संसृष्टि और संकर इसके प्रमुख भेद हैं, जो काव्य को विशेष कलात्मकता प्रदान करते हैं।
FAQs – उभयालंकार
प्रश्न 1: उभयालंकार क्या है?
उत्तर: जहाँ शब्द और अर्थ दोनों के कारण काव्य में सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ उभयालंकार होता है।
प्रश्न 2: उभयालंकार के कितने भेद हैं?
उत्तर: दो — संसृष्टि और संकर उभयालंकार।
प्रश्न 3: संसृष्टि उभयालंकार क्या है?
उत्तर: जहाँ अनेक अलंकार अलग-अलग स्पष्ट पहचाने जाएँ।
प्रश्न 4: संकर उभयालंकार क्या है?
उत्तर: जहाँ अनेक अलंकार इस प्रकार मिल जाएँ कि उन्हें अलग पहचानना कठिन हो।
प्रश्न 5: उभयालंकार का उदाहरण बताइए।
उत्तर: “कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय।”