वीर बगड़ावत श्री देवनारायण कथा -2
राजस्थान में यह प्रथा है
कि सावन के महीने मे तीज के दिन कुंवारी कन्याएं झूला झूलने के लिये बाग में जाती
है। यही जानकर उस दिन बाघ सिंह और ब्राह्मण भी अपने बाग में झूले डालते हैं। बाघ
सिंह झूला झूलने के लिये आयी हुई कन्याओं से झूलने के लिये एक शर्त रखते हैं कि
झूला झूलना है तो मेरे साथ फैरे लेने होगें? लड़कियां पहले तो मना कर
देती है लेकिन फिर आपस में बातचीत करती है कि फैरे लेने से कोई इसके साथ शादी थोड़े
ही हो जायेगी।
लड़कियों के माता-पिता राजा
बिसलदेवजी के पास जाकर यह बात बताते हैं। राजा बिसलदेवजी एक युक्ति निकालते हैं और
सब लड़कियों को एक जगह एकत्रित करते हैं और उनके पास पहरे पर एक बूढ़ी दाई को बैठा
देते हैं, और
कहते हैं कि यह बहरी है इसे कुछ सुनाई नहीं देता है। सारी लड़कियां आपस में
खुसर-फुसर करती हैं और कहती हैं कि मैंने कहा था कि बाघ सिंह के साथ फैरे नहीं लो
और तुम नहीं मानी। उसी का यह अंजाम है कि आज अपनी शादी नहीं हो पा रही है। यह बात
बूढ़ी औरत सुन लेती है, और
दूसरे दिन राजा बिसलदेवजी को सारी बात बताती है। फिर राजा बिसलदेवजी बाघ सिंह को
बुलाते हैं और उन्हें फटकार लगाते हैं।
बाघ सिंह कहते है कि मैं एक
बाथ भरूंगा, जो
लड़कियां मेरी बाथ में आ जायेगी उनसे तो मैं शादी कर लूंगा और बाकि लड़कियों के सावे
निकल जायेगें। बाघ सिंह जब बाथ भरते हैं उनकी बाहों में १३ लड़कियां समा जाती है।
जिससे बाघ सिंह शादी करने को तैयार हो जाते है। १२ लड़कियों से स्वयं शादी कर लेते
हैं और एक लड़की अपने ब्राह्मण मित्र को जो फैरे करवाता है, उसको दे देते है।
Tags:
देवनारायण कथा